अध्याय 15 - शान्तिदूत श्रीकृष्ण
महाभारत का प्रसंग | Short Q&A | संक्षिप्त उत्तर
1. प्रश्नोत्तर - संक्षिप्त में
क) धृतराष्ट्र के मंत्री कौन थे?
उत्तर - संजय थे।
ख) संजय के समझाने पर युधिष्ठिर ने क्या उत्तर दिया?
मैं युद्ध नहीं चाहता, सुख-शांति चाहता हूँ। हमारा राज्य लौटा दें तो सब भूल जाएंगे। हम 5 भाई हैं, 5 गाँव ही दे दें तो भी संतोष कर लेंगे। हम शांति और युद्ध दोनों के लिए तैयार हैं।
ग) श्रीकृष्ण जी शान्ति-दूत बनकर हस्तिनापुर क्यों गए?
युद्ध टालने के लिए। सबके समझाने पर भी दुर्योधन नहीं माना, तो अंत में स्वयं श्रीकृष्ण ने सोचा एक बार मैं खुद जाकर समझाऊँ, शायद शांति हो जाए।
घ) दुर्योधन को समझौता के लिए किस-किस ने समझाया?
विराट के पुरोहित
संजय
भीष्म
द्रोण
श्रीकृष्ण
गांधारी
धृतराष्ट्र
पर दुर्योधन किसी की बात नहीं माना।
2. निम्न वाक्य किसने कहे हैं -
| वाक्य | किसने कहा? |
|---|---|
| क) हमें पाँच गाँव ही दे दें, हम उसी से सन्तोष कर लेंगे। |
युधिष्ठिर ने संजय से |
| ख) मैं तो सुई की नोंक भर भूमि भी उन्हें नहीं दूँगा। |
दुर्योधन ने धृतराष्ट्र से |
| ग) पाण्डव शान्ति के लिए भी तैयार हैं और युद्ध के लिए भी। |
युधिष्ठिर + श्रीकृष्ण धृतराष्ट्र से |
✨ शिक्षा - घमंड और हठ से विनाश होता है, शांति से ही सुख मिलता है ✨
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