पालमपुर गाँव - प्रश्न उत्तर
2. खेती की आधुनिक विधियों के लिए उद्योगों में बने आगतों की आवश्यकता, क्या आप सहमत हैं?
हाँ, मैं सहमत हूँ। आधुनिक खेती HYV बीजों पर आधारित है। इन बीजों से अच्छी उपज लेने के लिए रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, ट्रैक्टर, थ्रेशर और बिजली के ट्यूबवेल जैसे साधनों की जरूरत होती है। ये सभी चीजें कारखानों में बनती हैं। इसलिए आधुनिक खेती उद्योगों पर पूरी तरह निर्भर है। बिना औद्योगिक आगतों के आधुनिक खेती संभव नहीं है।
3. पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की किस तरह मदद की?
पालमपुर में बिजली आने से सिंचाई का तरीका पूरी तरह बदल गया।
- पहले किसान रहट से कुओं का पानी निकालते थे, अब बिजली से ट्यूबवेल चलने लगे।
- इससे बहुत कम समय में ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई होने लगी।
- बिजली सस्ती और प्रदूषण-मुक्त है, जिससे खेती की लागत घटी।
- सिंचाई के साथ-साथ बिजली का उपयोग थ्रेशर चलाने और अन्य कृषि कार्यों में भी होता है, जिससे बुआई व कटाई आसान हुई।
4. क्या सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है? क्यों?
हाँ, सिंचित क्षेत्र बढ़ाना बहुत जरूरी है क्योंकि:
- भारत में मानसून अनिश्चित है, सिंचाई से फसल को सूखे से बचाया जा सकता है।
- HYV बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशक तभी असरदार हैं जब पानी पर्याप्त हो।
- सिंचाई से एक साल में एक ही जमीन पर 2-3 फसलें ली जा सकती हैं, उत्पादन बढ़ता है।
- सिंचाई से सूखे इलाकों में भी खेती संभव हो जाती है, खाद्य सुरक्षा बढ़ती है।
5. पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि के वितरण की सारणी
| परिवारों की संख्या | भूमि का आकार |
|---|---|
| 150 परिवार | भूमिहीन |
| 240 परिवार | 2 हेक्टेयर से कम - छोटे किसान |
| 60 परिवार | 2 हेक्टेयर से ज्यादा - मध्यम व बड़े किसान |
6. पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम क्यों है?
पालमपुर में श्रमिकों की संख्या काम की उपलब्धता से ज्यादा है। खेती का काम मौसमी है, इसलिए साल भर काम नहीं मिलता। श्रमिकों में प्रतियोगिता ज्यादा है, इसलिए वे सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम पर भी काम करने को तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा ज्यादातर श्रमिक अकुशल हैं और उनके पास काम का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
7. दो श्रमिकों से बातचीत
मैंने मोहन और राजू, दो खेतिहर मजदूरों से बात की। उन्हें ₹80 प्रतिदिन मजदूरी मिलती है, जो न्यूनतम मजदूरी से कम है। कभी-कभी मालिक नकद की जगह अनाज दे देता है। काम सिर्फ बुआई और कटाई के मौसम में मिलता है, यानी साल में 6-7 महीने ही। बाकी समय बेरोजगार रहते हैं। परिवार चलाने के लिए उन्होंने साहूकार से कर्ज लिया हुआ है, जिस पर बहुत ब्याज देना पड़ता है।
8. एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग तरीके
एक ही जमीन से ज्यादा उत्पादन इन तरीकों से लिया जा सकता है:
- बहुविध फसल प्रणाली: एक साल में गेहूं, धान, आलू जैसी 2-3 फसलें उगाना।
- आधुनिक आगत: HYV बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक का सही उपयोग।
- सिंचाई: ट्यूबवेल से समय पर पानी देना।
- मशीनीकरण: ट्रैक्टर, थ्रेशर से समय व श्रम बचाकर जल्दी अगली फसल लगाना।
9. एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के कार्य का ब्योरा
एक हेक्टेयर वाला किसान छोटे किसान की श्रेणी में आता है। वह और उसका परिवार मिलकर ज्यादातर काम करते हैं। जुताई के लिए बैलों का हल इस्तेमाल होता है। बुआई, निराई, कटाई परिवार के सदस्य करते हैं। फसल कटाई के समय ज्यादा काम होने पर 1-2 मजदूर दिहाड़ी पर रखते हैं। पूँजी की कमी के कारण ये अक्सर पुराने तरीकों से ही खेती करते हैं।
10. मझोले-बड़े किसान vs छोटे किसान: पूँजी कैसे प्राप्त करते हैं?
मझोले और बड़े किसानों के पास 10 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन होती है। उत्पादन ज्यादा होने से वे फसल बेचकर पैसा बचाते हैं। इस बचत से अगले साल के लिए बीज, खाद खरीदते हैं या ट्रैक्टर लेते हैं। इसे 'कृषि अधिशेष' कहते हैं।
छोटे किसानों के पास जमीन कम है। उत्पादन सिर्फ घर चलाने लायक होता है, बचत नहीं हो पाती। इसलिए बीज-खाद के लिए इन्हें बड़े किसान या साहूकार से 24% से 36% ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है।
छोटे किसानों के पास जमीन कम है। उत्पादन सिर्फ घर चलाने लायक होता है, बचत नहीं हो पाती। इसलिए बीज-खाद के लिए इन्हें बड़े किसान या साहूकार से 24% से 36% ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है।
11. सविता को तेजपाल से ऋण किन शर्तों पर मिला? बैंक से मिलता तो?
सविता को बीज, खाद व ट्यूबवेल के लिए पैसे चाहिए थे। तेजपाल सिंह ने ₹3000 का कर्ज 4 महीने के लिए 24% वार्षिक ब्याज पर दिया। साथ ही शर्त रखी कि सविता को फसल के मौसम में उसके खेत में ₹35 प्रतिदिन पर काम करना होगा।
अगर सविता को बैंक से 12% ब्याज पर कर्ज मिलता, तो ब्याज कम लगता और उसे तेजपाल के खेत में कम मजदूरी पर बंधुआ की तरह काम नहीं करना पड़ता। वह अपने खेत पर ज्यादा ध्यान दे पाती।
अगर सविता को बैंक से 12% ब्याज पर कर्ज मिलता, तो ब्याज कम लगता और उसे तेजपाल के खेत में कम मजदूरी पर बंधुआ की तरह काम नहीं करना पड़ता। वह अपने खेत पर ज्यादा ध्यान दे पाती।
14. गाँवों में गैर-कृषि कार्य कैसे बढ़ाएं?
गाँवों में गैर-कृषि काम बढ़ाने के लिए:
- सस्ता कर्ज: बैंकों द्वारा छोटे उद्योग, दुकान, डेयरी के लिए आसानी से लोन देना।
- बाजार व परिवहन: गाँवों को पक्की सड़क से शहरों से जोड़ना ताकि सामान बेच सकें।
- प्रशिक्षण: कंप्यूटर, सिलाई, रिपेयरिंग जैसे कामों की ट्रेनिंग देना।
- बुनियादी सुविधा: 24 घंटे बिजली, इंटरनेट देना ताकि छोटे कारखाने लग सकें।
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