Chapter 4 - कृषि | सभी प्रश्नोत्तर | JCERT Class 8

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
i. कृषि एक प्राथमिक क्रिया है।
ii. भारत की कुल भूमि का 51.09% कृषि योग्य है। (झारखण्ड में 37.30%)
iii. स्थानांतरी कृषि को उत्तर-पूर्वी भारत में झूम खेती कहते हैं।
iv. चाय, कहवा, रबर रोपण कृषि की फसलें हैं।
v. चावल का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है।
2. सही उत्तर लिखें

i. सुनहरा रेशा के नाम से जाना जाता है -

उत्तर: पटसन / जूट - इसे बंगाल का सुनहरा रेशा भी कहते हैं।

ii. कहवा का सबसे बड़ा उत्पादक देश है -

उत्तर: ब्राजील - ब्राजील को विश्व का कॉफी का कटोरा कहते हैं।

iii. भारत में चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है -

उत्तर: दार्जिलिंग - भारत में सबसे अधिक चाय असम में होती है।

iv. चावल किस प्रकार की कृषि की प्रमुख फसल है -

उत्तर: जीवन निर्वाह / गहन निर्वाह कृषि
3. एक वाक्य में उत्तर दें

i. आर्थिक क्रियाएँ कितने प्रकार की होती हैं?

तीन प्रकार की - प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक।

ii. प्राथमिक क्रिया का उदाहरण लिखिए।

कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खनन।

iii. चलवासी पशुचारण भारत के किस राज्य में होता है?

राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में। गद्दी-गुज्जर जनजाति करती है।

iv. जूट के मुख्य उत्पादक देश कौन से हैं?

विश्व में - भारत और बांग्लादेश। भारत में - पश्चिम बंगाल सबसे बड़ा।
4. लघु उत्तरीय प्रश्न

i. कृषि क्या है?

फसल उत्पादन + पशुपालन = कृषि। Agriculture = Ager(भूमि) + Culture(जुताई)।

ii. निर्वाह और वाणिज्यिक कृषि में अंतर?

निर्वाह: परिवार के लिए, छोटा खेत, कम तकनीक। Ex- चावल।
वाणिज्यिक: बाजार में बेचने के लिए, बड़ा खेत, मशीन का उपयोग। Ex- गेहूँ, कपास।

iii. भारत में गहन निर्वाह कृषि क्यों प्रचलित है?

जनसंख्या अधिक और खेत छोटे होने के कारण एक ही खेत में साल में 2-3 फसलें उगाई जाती हैं।

iv. किस कृषि में फसल बाजार में बेचने के लिए उगाई जाती है?

वाणिज्यिक कृषि और रोपण कृषि में।
5. अंतर बताएं
रोपण कृषिवाणिज्यिक कृषि
एक ही फसल बड़े बागान में - चाय, कहवा, रबर। बहुत अधिक पूँजी और श्रमिक लगते हैं।अनाज जैसे गेहूँ को बेचने के लिए बड़े पैमाने पर उगाना।
ViticultureHorticulture
अंगूर की खेतीफल, फूल, सब्जियों की खेती
6. कारण बताएं

i. रोपण कृषि एक प्रकार का वाणिज्यिक कृषि है।

क्योंकि इसमें फसल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि लाभ कमाने के लिए बाजार में बेची जाती है।

ii. पटसन को सुनहरा रेशा कहा जाता है।

क्योंकि इसका रंग सुनहरा होता है, यह कीमती है और इससे बोरे, रस्सी, दरी बनती है।
7. मुख्य फसलें - भौगोलिक दशा (शॉर्ट नोट्स)
गेहूँ
बोते समय 14°C, काटते समय 18°C, वर्षा 50-100 cm, दोमट मिट्टी, पाला रहित रातें, तेज धूप। उत्पादक: USA, कनाडा, रूस, ऑस्ट्रेलिया। भारत में: पंजाब, हरियाणा, UP, बिहार। भारत की दूसरी प्रमुख फसल।
मिलेट / मोटा अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी)
अर्द्ध शुष्क जलवायु। बाजरा - 45 cm वर्षा, 25°C। ज्वार - 30-100 cm, 20-32°C। बलुई व लाल मिट्टी। भारत में: बाजरा-राजस्थान (सबसे बड़ा), ज्वार-महाराष्ट्र, रागी-कर्नाटक।
मक्का
मूल स्थान - मेक्सिको। 18-27°C, 60-100 cm वर्षा, बलुई मिट्टी। उत्पादक: USA, चीन, ब्राजील। भारत में: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, MP। तीसरी प्रमुख खाद्य फसल।
कपास - सफेद सोना
24°C, 60-100 cm वर्षा, काली व जलोढ़ मिट्टी, 210 पाला रहित दिन। उत्पादक: USA, चीन, भारत, पाकिस्तान, ब्राजील, मिस्र। भारत में: दक्कन की काली मिट्टी सर्वोत्तम। महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु। भारत कपास का जन्मदाता है।
पटसन / जूट - बंगाल का सुनहरा रेशा
नई जलोढ़ मिट्टी, जल जमाव वाला डेल्टा क्षेत्र, गर्म व आर्द्र जलवायु। उत्पादक: भारत, बांग्लादेश, चीन। भारत में: पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार।
कॉफी - दूसरी प्रमुख पेय फसल
खोज - इथियोपिया के कफा प्रांत में, कैफीन तत्व। 25-30°C, 150-200 cm वर्षा, पर्वतीय ढाल। उत्पादक: ब्राजील (कॉफी का कटोरा), कोलंबिया, भारत। भारत में: कर्नाटक सबसे बड़ा, केरल, तमिलनाडु।
चाय - सबसे प्रचलित पेय फसल
शुरुआत चीन के सम्राट शेननुंग से। 21-29°C, 150-250 cm वर्षा, पर्वतीय ढाल जहाँ जल जमाव न हो, अम्लीय मिट्टी। पत्ते तोड़ने के लिए अधिक श्रमिक। उत्पादक: चीन, भारत, श्रीलंका, केन्या। भारत में: असम सबसे बड़ा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल। ओलांग चाय ताइवान में पैदा होती है।
8. भारत का एक फार्म Vs USA का फार्म + Zero Budget

भारत का फार्म (मुन्नालाल - गाजीपुर, UP)

1.5 हेक्टेयर, भाड़े के ट्रैक्टर से जुताई, नलकूप से सिंचाई, अधिक उपज वाले बीज, 2 फसल गेहूँ-चावल, 2 भैंस व कुछ मुर्गियाँ, दूध सहकारी भंडार में बेचना, बैंक से ऋण, भंडारण की कमी से बाजार अनुकूल न होने पर भी बेचना पड़ता है।

USA का फार्म (जो होरेन - आयोवा)

300 हेक्टेयर, फार्म हाउस में रहना, मक्का, सोयाबीन, गेहूँ, चुकंदर, मिट्टी जाँच प्रयोगशाला में, कंप्यूटर उपग्रह से जुड़ा, ट्रैक्टर, बीज बोने की मशीन, हार्वेस्टर, थ्रेसर, कीटनाशक का हवाई छिड़काव, अनाज भंडार में एकत्र कर बाजार में भेजना। किसान व्यवसायी की तरह काम करता है।

Zero Budget Farming

उर्वरक, कीटनाशक, गहन सिंचाई का कम प्रयोग - लागत शून्य। प्राकृतिक विधियों से नमी बढ़ाना। खोज - महाराष्ट्र के सुभाष पालेकर द्वारा। फायदे: 1. लागत कम 2. मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है 3. गोबर-मूत्र से पशुपालन को बढ़ावा।

"इतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में" - भोजन की बर्बादी रोकें

JCERT Text Book 2024-2025 | Chapter 4 - Krishi Notes