Notes: भारतीय संविधान के आयाम
1. संविधान का निर्माण
- विश्व का सबसे बड़ा एवं लिखित संविधान।
- वर्षों के संघर्ष, आंदोलनों और राष्ट्रीय चिंतन का परिणाम।
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही राजनीतिक स्वरूप पर विचार शुरू।
- उद्देश्य: भेदभाव रहित समाज, हर नागरिक को समान सम्मान।
- डॉ. बी. आर. अंबेडकर = संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष।
2. संघवाद (Federalism)
- अर्थ: देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकारें - केंद्र, राज्य, स्थानीय।
- तीन सूचियाँ:
- संघ सूची: सुरक्षा, वित्त, संचार - कानून केंद्र बनाता है।
- राज्य सूची: भूमि, कृषि, पुलिस - कानून राज्य बनाता है।
- समवर्ती सूची: शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण - केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। मतभेद पर केंद्र का कानून मान्य।
- कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र व राज्य को। स्थानीय सरकार को नहीं।
3. संसदीय शासन पद्धति (Parliamentary System)
- विशेषता: व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के बीच घनिष्ठ संबंध।
- कार्यपालिका की शक्ति मंत्रिमंडल/कैबिनेट में निहित, एक व्यक्ति के हाथ में नहीं।
- कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी।
- वास्तविक शक्ति: मंत्रिपरिषद के हाथ में, प्रधानमंत्री इसका मुखिया।
- राष्ट्रपति: संवैधानिक अध्यक्ष, वास्तविक शक्ति नहीं।
- प्रधानमंत्री लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है।
4. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका
- स्वतंत्रता: सरकार के अन्य अंगों का हस्तक्षेप नहीं।
- निष्पक्षता: किसी विशेष व्यक्ति/संस्था के लिए काम नहीं।
- प्रावधान:
- न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, पर पदमुक्त सिर्फ महाभियोग से कर सकता है।
- अधीन कर्मचारियों की नियुक्ति/सेवा शर्तों पर सरकार का हस्तक्षेप नहीं।
- पदमुक्त न्यायाधीश सरकार के अधीन पद या उसी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता।
- वेतन संचित निधि से, संसद मतदान नहीं कर सकती।
5. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
- अनुच्छेद 12-35: मौलिक अधिकारों का वर्णन।
- पहले 7 थे, अब 6: संपत्ति का अधिकार 44वें संशोधन 1978 में हटा दिया गया।
- विशेषता: न्यायालय की शरण ली जा सकती है यदि हनन हो।
- प्रमुख 6 अधिकार:
- समानता का अधिकार: कानून की नजर में सब समान। धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं। सार्वजनिक स्थानों पर रोक नहीं।
- स्वतंत्रता का अधिकार: अभिव्यक्ति, भाषण, शांतिपूर्ण सभा, संगठन, देश में आने-जाने, रहने, कोई भी व्यवसाय करने का अधिकार। प्रेस, मीडिया भी शामिल।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार: मानव तस्करी, बेगार, जबरन श्रम का निषेध। 14 वर्ष से कम बच्चों से खतरनाक काम कराना अपराध।
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार: कोई भी धर्म अपनाने, प्रचार-प्रसार का अधिकार।
- सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार: अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी संस्कृति की रक्षा और शैक्षणिक संस्थान खोलने का अधिकार।
- संवैधानिक उपचार का अधिकार: मौलिक अधिकार के उल्लंघन पर अदालत जा सकते हैं।
6. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
- जोड़े गए: 42वें संविधान संशोधन 1976, स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर, अनुच्छेद 51(A)।
- वर्तमान में 11 कर्तव्य। प्रमुख हैं:
- संविधान का पालन, आदर्शों, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान का आदर।
- स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों को अपनाना।
- भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता की रक्षा।
- देश की रक्षा करना, सेवा करना।
- समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना, महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली प्रथाओं का त्याग।
- सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का संरक्षण।
- प्राकृतिक पर्यावरण - वन, झील, नदी, वन्य जीव की रक्षा।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, ज्ञानार्जन का विकास।
- सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा।
- सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास।
- माता-पिता/संरक्षक द्वारा 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देना।
7. धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
- अर्थ: धर्म के प्रति निरपेक्ष भाव, धर्म और राज्य की शक्ति को अलग रखना।
- भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है - किसी एक धर्म को समर्थन नहीं।
- सरकारी संस्थानों में किसी खास धर्म को प्रोत्साहन नहीं।
- 3 निष्कर्ष:
- एक धार्मिक समुदाय दूसरे को दबा नहीं सकता।
- एक ही धर्म के लोग उसी धर्म के अन्य व्यक्ति को दबा नहीं सकते।
- राज्य किसी खास धर्म को थोप नहीं सकता और न ही धार्मिक स्वतंत्रता छीन सकता है।
8. मानवाधिकार
- परिभाषा: जन्म से प्राप्त अधिकार, कोई सामाजिक/राजनीतिक व्यवस्था बदल नहीं सकती।
- शामिल: जीवन, स्वतंत्रता, समानता, प्रतिष्ठा से जुड़े अधिकार।
- मानवाधिकार दिवस: 10 दिसंबर। 1948 में UNO ने घोषणा की थी।
- भारत में: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन 1993 में, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत।
- आयोग के कार्य: दीवानी अदालतों की सारी शक्तियाँ, गवाहों को बुलाना, जाँच कराना।
1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
- किसी व्यक्ति को उसके जन्म से मिलने वाले अधिकार मानवाधिकार कहलाते हैं।
- शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है।
- स्वर्ण सिंह समिति की रिपोर्ट के आधार पर संविधान में मूल कर्तव्य शामिल किए गए हैं।
- संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है।
- मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
i) संविधान में वर्णित किन्हीं पाँच मौलिक कर्तव्यों को लिखिए।
- संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान का आदर करना।
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।
- देश की रक्षा करना और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करना।
- प्राकृतिक पर्यावरण - वन, झील, नदी और वन्य जीवों की रक्षा करना।
- माता-पिता/संरक्षक द्वारा 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना।
ii) भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त किन्हीं तीन मौलिक अधिकारों को लिखिए।
- समानता का अधिकार: कानून की नजर में सब समान, धर्म-जाति-लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं।
- स्वतंत्रता का अधिकार: अभिव्यक्ति, भाषण, शांतिपूर्ण सभा, संगठन बनाने, देश में कहीं भी आने-जाने का अधिकार।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार: मानव तस्करी, बेगार, जबरन श्रम का निषेध। 14 वर्ष से कम बच्चों से खतरनाक काम कराना अपराध।
iii) 'शिक्षा का अधिकार' से आप क्या समझते हैं?
'शिक्षा का अधिकार' 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा अनुच्छेद 21(क) में जोड़ा गया मौलिक अधिकार है। इसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार है। इसे लागू करने के लिए Right to Education Act 2009 बनाया गया जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। राज्य का कर्तव्य है कि हर बच्चे को पास के स्कूल में शिक्षा उपलब्ध कराए।
iv) मानवाधिकार से आप क्या समझते हैं?
मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो मनुष्य को जन्म से ही प्राप्त होते हैं। इन्हें कोई सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था बदल नहीं सकती। इनमें जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा से जुड़े अधिकार शामिल हैं। मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। भारत में इनकी रक्षा के लिए 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया।
v) 'धर्मनिरपेक्षता' शब्द का क्या अर्थ है?
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है - धर्म के प्रति निरपेक्ष भाव रखना। यानी धर्म और राज्य की शक्ति को अलग रखना। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जिसका मतलब है कि राज्य किसी एक धर्म को समर्थन नहीं देगा। सरकारी संस्थानों में किसी खास धर्म को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। राज्य न तो कोई धर्म थोप सकता है और न ही किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीन सकता है।
आइए चर्चा करें
3. भारत की संसदीय शासन पद्धति का उल्लेख कीजिए।
भारत में ब्रिटेन की तरह संसदीय शासन पद्धति अपनाई गई है। इसकी मुख्य विशेषताएँ:
- व्यवस्थापिका और कार्यपालिका में घनिष्ठ संबंध: कार्यपालिका विधायिका के सदस्यों से ही बनती है। प्रधानमंत्री और मंत्री लोकसभा/राज्यसभा के सदस्य होते हैं।
- सामूहिक उत्तरदायित्व: कार्यपालिका की शक्ति एक व्यक्ति में नहीं बल्कि पूरे मंत्रिमंडल में निहित होती है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
- वास्तविक और नाममात्र प्रमुख: वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के हाथ में होती है जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है। राष्ट्रपति केवल संवैधानिक अध्यक्ष है, वास्तविक शक्ति नहीं।
- बहुमत का शासन: प्रधानमंत्री लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है। यदि सरकार लोकसभा का विश्वास खो दे तो पूरे मंत्रिमंडल को त्यागपत्र देना पड़ता है।
4. भारत के संघवाद/संघीय ढांचा का वर्णन कीजिए।
संघवाद का अर्थ है देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकारें - केंद्र, राज्य और स्थानीय। भारत एक संघीय देश है पर यहाँ केंद्र को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, इसलिए इसे "एकात्मक लक्षणों वाला संघ" भी कहते हैं।
शक्ति विभाजन के लिए तीन सूचियाँ:
- संघ सूची: 97 विषय - सुरक्षा, विदेश, वित्त, संचार। इस पर सिर्फ केंद्र कानून बनाता है।
- राज्य सूची: 66 विषय - भूमि, कृषि, पुलिस, स्थानीय शासन। इस पर सिर्फ राज्य कानून बनाते हैं।
- समवर्ती सूची: 47 विषय - शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, वन। इस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, पर टकराव होने पर केंद्र का कानून मान्य होगा।
5. भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका के लिए संविधान में किए गए प्रावधानों की व्याख्या कीजिए।
न्यायपालिका को सरकार के अन्य अंगों के दबाव से मुक्त रखने के लिए ये प्रावधान हैं:
- नियुक्ति और पदमुक्ति: न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, पर उन्हें पद से सिर्फ महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया बहुत कठिन है।
- सेवा शर्तों में हस्तक्षेप नहीं: अधीन कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा शर्तों पर सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता।
- सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिबंध: पदमुक्त न्यायाधीश सरकार के अधीन कोई लाभ का पद नहीं ले सकता और न ही उसी न्यायालय में वकालत कर सकता है।
- वेतन की सुरक्षा: न्यायाधीशों का वेतन संचित निधि से दिया जाता है। संसद इस पर मतदान नहीं कर सकती, न ही इसे कम कर सकती है।
इन प्रावधानों से न्यायपालिका सरकार के दबाव से मुक्त रहकर निष्पक्ष न्याय कर पाती है।
6. 'एक लोकतांत्रिक देश में मौलिक अधिकार का होना बहुत जरूरी है।' क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तीन तर्क दीजिए?
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। तीन तर्क:
- तानाशाही से बचाव: मौलिक अधिकार सरकार की शक्ति पर लगाम लगाते हैं। यदि ये न हों तो सरकार मनमानी कर सकती है और नागरिकों की स्वतंत्रता छीन सकती है। लोकतंत्र तभी बचेगा जब सरकार की भी सीमाएँ हों।
- समानता और सम्मान की गारंटी: समानता का अधिकार धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव रोकता है। शोषण के विरुद्ध अधिकार कमजोर वर्गों को बचाता है। इनके बिना लोकतंत्र में 'जनता का शासन' का मतलब ही खत्म हो जाएगा।
- न्याय पाने का हक: संवैधानिक उपचार का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी का मौलिक अधिकार छीना जाए तो वह सीधे न्यायालय जा सकता है। बिना इस अधिकार के बाकी सब अधिकार कागजी बनकर रह जाएँगे।
7. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को क्यों शामिल किया गया? किन्हीं तीन मौलिक कर्तव्यों को लिखिए?
क्यों शामिल किए गए:
मौलिक अधिकार नागरिकों को राज्य से अधिकार देते हैं, पर लोकतंत्र सिर्फ अधिकारों से नहीं चलता। नागरिकों के भी देश के प्रति कुछ कर्तव्य होने चाहिए। अधिकार और कर्तव्य एक सिक्के के दो पहलू हैं। इसे समझते हुए 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर अनुच्छेद 51(A) में 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। 11वाँ कर्तव्य 86वें संशोधन 2002 में जोड़ा गया। इनका उद्देश्य नागरिकों में अनुशासन, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाना है।
तीन मौलिक कर्तव्य:
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना और उसे अक्षुण्ण रखना।
- प्राकृतिक पर्यावरण - वन, झील, नदी और वन्य जीवों की रक्षा करना और उनका संवर्धन करना।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करना।
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